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“अगर मुझे किसी ऐसे अभि‍नेता को पेश करना हो जो अपने होने भर से एक निहायत ही नफ़ीस तरीके से अपने मन की बात कह सकता हो, तो मैं तुरंत इरफ़ान ख़ान की ओर इशारा करूँगा।”
अमिताभ बच्चन

“इस किताब के पन्ने पलटते हुए मैं रोई, मैं हँसी, लेकिन सबसे अहम यह है कि मुझे इसने अपनी गिरफ़्त में ले लिया। यह किताब उन सभी को उत्साह और सुकून देगी जो इरफ़ान से प्रेम करते हैं।”
तिलोत्तमा शोम, अभि‍नेत्री

“इस किताब का अपना ही आब-ओ-रंग है – इसमें इरफ़ान और अनूप सिंह की हमेशा क़ायम रहने वाली दोस्ती दर्ज है, अभि‍नेता की फ़नकारी को देखने का नज़रिया है और फ़ि‍ल्म बनाने के जादू के भीतर झाँका भी जा सकता हैं।”

अनुपमा चोपड़ा, अ प्लेस इन माय हार्ट की लेखिका

 

“और कोई भी इरफ़ान को इतने सहज और जीवंत ढंग से पेश नहीं कर सकता है जैसा अनूप सिंह ने अपनी निहायत शायराना और बेहद सिनेमाई अंदाज़ में लिखी गई इस किताब में किया है।“

नम्रता जोशी, रील इंडिया की लेखिका

 

“यह गद्य हमें ताक़त और सुंदरता की उस रूह तक ले जाता है जिसने इरफ़ान की सिनेमाई ज़िंदगी को एक साथ बेहद संवेदी और ग़ैर-हक़ीक़ी ढंग से रूहानी बना दिया था।”
शोइकत मजूमदार, उपन्यासकार

“मैं हर उस इंसान को यह किताब पढ़ने की सलाह देता हूँ जिसकी ज़िंदगी को इरफ़ान ने छुआ है।”
अंकुर पाठक, लेखक और मनोरंजन पत्रकार

इरफ़ान : जहाँ ले चले हवा

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